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char phool hain aur dunia hain

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Chaar phool hai aur dunia hai
कभी कभी मुझे लगता है कि मौलिकता जो है, उसमें बहुत बड़ा हाथ जो है, उसमें भूलने का भी होता है। अगर बहुत सारी चीज़ें आपको याद रहेंगी, तो, कहीं न कहीं वो शोर की तरह होता है, और जब आप भूल जाएंगे तो कहीं न कहीं मौलिकता आपकी बची रह जाएगी। (मुस्कुराते हुए)
अब तो मुझे लगता है, विद्वत्ता और मौलिकता, दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं। जो विद्वान है वो मौलिक शायद नहीं हो, उतना मौलिक नहीं हो, लेकिन जो मौलिक है, वो (ठहरते हुए) विद्वान हो सकता है। (मुस्कुराते हुए)
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